उनका निधन साहित्य जगत की अपूर्णनीय क्षति है। 
बाराबंकी। प्रकाशन साहित्य जगत के प्रमुख हस्ताक्षर रहे समाजसेवी श्याम सुन्दर जी का बीते शनिवार को नई दिल्ली में स्वर्गवास हो गया। वह अपने पीछे तीन पुत्र पवन कुमार, प्रभात कुमार और पीयूष कुमार सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए। उन्होंने हिन्दी के साहित्यिक परिदृश्य को अपनी गरिमामय उपस्थिति से जीवंत रखते हुए दशको तक अपनी साहित्यिक सक्रियता से हिन्दी को समृद्ध किया। उनका निधन साहित्य जगत की अपूर्णनीय क्षति है। 

यह बात गाँधी भवन में प्रभात प्रकाशन के संस्थापक एवं समाजसेवी श्यामसुंदर जी के निधन पर गाँधी जयंती समारोह ट्रस्ट द्वारा आयोजित शोक सभा की अध्यक्षता कर रहे समाजवादी चिंतक राजनाथ शर्मा ने कही। इस मौके पर दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत की आत्मा शांति की ईश्वर से प्रार्थना की गई। 

सभा को संबोधित करते हुए श्री शर्मा ने बताया कि प्रभात प्रकाशन के माध्यम से स्व श्याम सुन्दर जी ने कई विधाओं और कई भाषाओं में साहित्य का प्रकाशन किया। देश की सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय आन्दोलन और भारतीय राजनीति के पहलुओं को प्रकाशित करके समाज में प्रचारित किया। उन्होंने प्रकाशन को विचारों के प्रसार के लिए लिया, ना कि व्यवसाय के लिए लिया। 

गाँधी ट्रस्ट के प्रमुख न्यासी वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा ने दूरभाष से अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि स्व. श्याम सुन्दर जी का इस संसार से जाना एक ऋषि मनीषी का जाना है। हिन्दी सेवी का जाना है। प्रखर राष्ट्रवादी का जाना है। वह मेरे अभिभावक थे। मेरे लिए यह बेहद दुखद क्षण है क्योंकि पहले देवेन्द्र द्विवेदी, फिर प्रभाष जोशी, फिर प्रो. नामवर सिंह और अब श्याम सुंदर जी। सभी से मेरा आत्मीय रिश्ता रहा है। दिल्ली में अब मैं वैचारिक रूप से अनाथ हो गया हूँ। कोई ऐसा ठिकाना नहीं रहा, जिनसे जीवन और जगत के बारे में दिशा मिल सके। कन्धे पर रख दुकानों में जाकर किताब बेच उन्होंने प्रभात प्रकाशन का निर्माण किया। वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़े थे। संघ से जुड़े होने के बाद भी अन्त समय तक उन्होंने व्यवसाय को विचारधारा पर हावी नहीं होने दिया। वे ऐसी पाण्डुलिपियों एक झटके में खारिज करते जो राष्ट्रवादी विचारों से उलट होती। 

इस मौके पर प्रमुख रूप से समाजसेवी अशोक शुक्ला, पाटेश्वरी प्रसाद, विनय कुमार सिंह, मृत्युंजय शर्मा, रवि प्रताप सिंह, विजय कुमार सिंह, सत्यवान वर्मा, मनीष सिंह, अनिल यादव, नीरज दूबे, पी.के सिंह, उदय प्रताप सिंह, अशोक जायसवाल आदि लोग मौजूद रहे।

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