चार दिवसीय सालाना मेला शुरू

मसौली, बाराबंकी। कस्बा बड़ागांव स्थित हजरत काजी सहाबुद्दीन औलिया परकाले आतिशी( रह0) की मजार शरीफ पर मंगलवार की शाम से बीवियों के मेले के साथ चार दिवसीय सालाना मेला शुरू हो गया है। मेले में दूरदराज से आने वाले जायरीनो की आमद शुरू हो गई है जो बाबा की मजार शरीफ पर माथा टेककर दुआएं एवं मन्नत मांग रहे हैं।
       उल्लेखनीय कि हजरत सैय्यद अब्दुर्ररज्जक शाह( रह0) बांसा शरीफ की मजार शरीफ पर ईद उल फितर के दिन से चलने वाले आठ दिवसीय सालाना मेला के बाद कस्बा बड़ागांव में प्रतिवर्ष हजरत काजी साहबउद्दीन औलिया परकाले आतिशी( रह0) याद में चार दिवसीय सालाना मेला लगता है मेले में दूरदराज से हजारों जायरीन बाबा की मजार पर माथा टेकने वह मन्नत मांगने आते हैं मेले में झूला, हिंडोला, गड़बड़झाला, खिलौने ,बर्तन ,क्राकरी ,बक्सों सहित तमाम दुकानें सज चुकी हैं। हजरत काजी शहाबुद्दीन औलिया (रह0) परकाले आतिशी रह0 के मद्रास, मुंबई ,असम ,कोलकाता सहित देश के अन्य स्थानों पर तमाम अकीदतमंद है जो 9 शव्वाल को बाबा की याद में बड़े-बड़े लंगर करते हैं तथा कई स्थानों पर बाबा का कुल शरीफ संपन्न होता है । कस्बा बड़ागांव में बाबा की मजार शरीफ पर 13 जून की भोर 3रू45 पर कुल शरीफ संपन्न होगा जिसमें जिले के तमाम स्थानों से हजारों लोग शामिल होंगे।
बाबा की याद में 12 जून 9 शव्वाल को घर घर बटेगी मदद
हजरत काजी शहाबुद्दीन औलिया परकाले आतिशी( रह0) की याद में 9 शव्वाल को पूरे कस्बे में प्रत्येक घर में बाबा की याद में मदद के रूप में आटा बांटा जाएगा जिसमें हिंदू मुस्लिम सहित समाज के सभी वर्ग के लोग बाबा की याद में मदद बांटते हैं और एक दूसरे के यहां तबर्रुक के रूप में मदद लेकर पकाकर खाते हैं।
बोलते हुए मुर्गे पर होती है कुर्बानियां 
हजरत काजी शहाबुद्दीन औलिया पर काले आतिशी (रह0) की फातिहा बोलते हुए मुर्गे पर होने के कारण गांव में तमाम देसी मुर्गों की दुकाने लगनी शुरू हो गई हैं जो दूर दराज से बोलते हुए देसी मुर्गी लाकर भेज रहे हैं रिवाज के  कारण देसी मुर्गा के दामों में काफी उछाल है। किवदन्तियों के मुताबिक हजरत काजी साहबउद्दीन औलिया परकाले आतिशी रह0 एक बार शिकार के दौरान अपनी बहन बीवी फैजल के घर गए और बहन से कहा की बहन खाने में क्या बना है बहन ने देसी मुर्गा बनाया था। लेकिन भाई से झूठ बोला और कहा की घर में दाल बनी है बाबा ने बहन से कई बार यही सवाल किया परंतु बहन ने हर बार दाल बनी होने की बात कही जिस पर बाबा को जलाल आ गया और कहा कि बोल दे मुर्गा कुकुडुक जिस पर पका हुआ मुर्गा पतीली से पंख पढ़ाता हुआ निकल आया और कुकड़ूकु बोला तभी से बोलते हुए मुर्गे की कुर्बानी पर बाबा के नाम फातिहा होती है। इस घटना के बाद बाबा की बहन ने अल्लाह से माफी मांगते हुए कहा कि हमने अपने भाई से झूठ बोला है धरती फट जाए और हम उसी में समा जाएं। उसी वक्त धरती फटी और बहन धरती में समा गई। जिनकी मात्र सिर की मजार कस्बा मसौली में तालाब के किनारे स्थित है जिनका कुल शरीफ बाबा के कुल के बाद होता है। हजरत काजी शहाबुद्दीन औलिया परकाले आतिशी( रह0) की याद में कस्बा बड़ागांव मसौली बांसा नैनामऊ शहाबपुर रसौली कोलकाता, मद्रास, मुंबई, मकनपुर, सलवन शरीफ सहित तमाम जगहों पर बाबा की याद में कार्यक्रम होते हैं।
साज सज्जा में जूते कमेटी के मेंबरान 
बाबा की मजार शरीफ पर लगने वाले चार दिवसीय सालाना मेले की साज सज्जा में अंजुमन आशिकान ए रसूल के मेम्बर हाफिज मेराज अहमद ,अमीनउद्दीन अंसारी ,मोहम्मद गुफरान, मोहम्मद इरफान, मोहम्मद अफजाल ,मोहम्मद वसीम ,हाजी नूर आलम, शादाब मिस्त्री, सफी गुर्जर, नूरउल बशर ,रजी अहमद आदि लोग बाबा की मजार शरीफ को सजाने एवं  में लगे हुए है।


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