स्क्रूटनी के बिना चुन लिया राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के दावेदार

प्रयागराज। जनपद स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कारों के लिए गठित चयन समिति की ओर से स्क्रूटनी किए बिना ही प्रदेश स्तर पर के लिए नाम चुनकर भेज दिया गया। राष्ट्रीय पुरस्कारों के चयन के लिए परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन मांगा गया था। पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वाले शिक्षकों का कहना है कि चयन समिति ने उनकी प्रस्तुति (ऑनलाइन) को देखे बिना ही मनमाने तरीके से एक शिक्षक का नाम चुनकर राज्य स्तर पर प्रस्तुति के लिए भेज दिया।


जिले में परिषदीय स्कूलों के तीन शिक्षकों की ओर ऑनलाइन आवेदन किया गया। बीएसए कार्यालय की ओर से इन शिक्षकों से नियम में शामिल नहीं होने के बाद भी अपने रिकार्ड की हार्ड कॉपी भी मांगी गई। दावेदारी करने वाली शिक्षिकाओं नीलिमा श्रीवास्तव, श्वेता श्रीवास्तव एवं वत्सला मिश्रा ने अपनी हार्ड कॉपी भी बीएसए कार्यालय में जमा कर दिया, इसके बाद इन शिक्षकों ने चयन समिति के अध्यक्ष जिला विद्यालय निरीक्षक आरएन विश्वकर्मा से मिलकर अपनी बात रखी थी। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए जिला स्तर पर चयन के लिए 100 नंबर की प्रस्तुति (ऑनलाइन) का नियम होने के बाद भी चयन समिति ने मनमाने तरीके से एक शिक्षक का नाम चुनकर राज्य समिति के पास भेज दिया।


पुरस्कार के लिए आवेदन करने वाली एक ने आरोप लगाया कि बिना प्रजेंटेशन के नाम भेज दिया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि जनपद स्तर पर प्रजेंटेशन का कोई नियम नहीं था। उन्होंने बताया कि रिकार्ड के आधार पर एक शिक्षिका का नाम राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए राज्य समिति के पास भेजा गया था। जिले से मनमाने तरीके से शिक्षक का चुनाव करके राज्य स्तर पर होने वाली स्क्रीनिंग के लिए नाम भेज दिया। इस बात को लेकर राज्य शिक्षक पुरस्कार के दावेदारों में असंतोष है।
परिषदीय विद्यालयों से राज्य शिक्षक पुरस्कार के बारे में शासन स्तर से ऑफलाइन आवेदन मांगा गया था। शासन की ओर से बीएसए से कहा गया था कि वह खंड शिक्षाधिकारी से राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए योग्य शिक्षकों से आवेदन मांगे। शिक्षकों का आरोप है कि खंड शिक्षाधिकारियों की ओर से इस बारे में कोई सूचना नहीं दी गई। शिक्षकों को सूचना दिए बिना ही बीएसए ने बहरिया विकास खंड की एक शिक्षिका जो सत्ताधारी दल से संबंधित है, उसका नाम जिले से राज्य पुरस्कार के लिए भेज दिया। इस शिक्षिका नाम पिछले वर्ष भी जिला स्तर से भेजा गया था परंतु स्क्रूटनी में उन्हें प्रदेश स्तर पर शामिल नहीं किया गया। अब एक आर फिर से जिला समिति ने उसी शिक्षिका का नाम आगे बढ़ा दिया है। इस बारे में जब जिले के खंड शिक्षाधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें राज्य पुरस्कार के बारे में कोई सूचना नहीं दी गई।


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