लखनऊ-कानपुर रोड पर शर्तों का उल्लंघन कर करोड़ों का टोल टैक्स वसूल रही निजी कंपनी
लखनऊ-कानपुर रोड पर बिना शर्तों का पालन किए निजी कंपनी हर साल करोड़ों रुपये टोल टैक्स वसूल रही है। टोल वसूलने के लिए हुए अनुबंध की शर्तों में यह शामिल है कि प्रति किलोमीटर सड़क के औसतन तीन मीटर से ज्यादा हिस्से में हल्के-फुल्के झटके भी नहीं लगने चाहिए। लेकिन, यहां तो एनएच-25 पर गड्ढे ही गड्ढे हैं।


करीब 75 किलोमीटर का सफर पूरा करने में राहगीरों की रीढ़ की हड्डी में दर्द होने लगता है। वहीं, अपने एसी दफ्तरों में बैठे एनएचएआई के अधिकारी मानते हैं कि मात्र 8 किलोमीटर सड़क ही खराब है, जिसे ठीक करने के निर्देश दिए हैं।किसी भी सड़क पर निजी कंपनी को टोल वसूलने का अधिकार देने से पहले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) उसके साथ अनुबंध करती है।
लखनऊ-कानपुर राजमार्ग ऑपरेट, मेंटेन एंड ट्रांसफर यानी ओएमटी मॉडल पर पीएंडसी कंपनी को दिया गया है। वर्ष 2013 में नौ साल के लिए उसके साथ अनुबंध किया गया। तय हुआ कि पहली साल कंपनी एनएचएआई को 150 करोड़ रुपये देगी। उसके बाद इस राशि में हर साल 10 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। अनुबंध की शर्तों में सड़क का रफनेस इंडेक्स (खुरदरापन) का भी जिक्र होता है।


सड़क मानक से 35 गुना ज्यादा खराब



अलग-अलग सड़कों के लिए होने वाले अनुबंध में रफनेस इंडेक्स अलग-अलग होता है। तकनीकी भाषा में इस रोड पर यह रफनेस 3000 बंप प्रति किलोमीटर होनी चाहिए। यानी तीन हजार मिलीमीटर यानी तीन मीटर प्रति किलोमीटर से ज्यादा रफनेस इंडेक्स नहीं होना चाहिए। यानी प्रति किलोमीटर में औसतन तीन मीटर से ज्यादा हल्के-फुल्के जर्क (झटके) भी नहीं लगने चाहिए।
एनएचएआई के अधिकारियों की मानें तो लखनऊ-कानपुर रोड पर 8 किलोमीटर यानी 8000 मीटर सड़क में गड्ढे मिले हैं, जिन्हें भरने के निर्देश कंपनी को दे दिए गए हैं। जबकि, अनुबंध कहता है कि 75 किलोमीटर सड़क पर किसी भी हालत में 225 मीटर से ज्यादा हिस्से में जर्क नहीं लगने चाहिए।
एनएचएआई के अधिकारियों के मुताबिक यह सड़क मानक से 35 गुना ज्यादा खराब है। नियमानुसार ऐसी स्थिति में निजी कंपनी पर पेनल्टी लगाई जा सकती है, लेकिन सबकुछ जानते हुए भी एनएचएआई के अधिकारी मौन हैं।




सुविधाओं पर नहीं, राहगीरों की जेब से रुपये निकालने पर ध्यान



अनुबंध के अनुसार सड़क के अलग-अलग हिस्से का हर पांच साल पर नवीनीकरण आवश्यक है। इस अवधि से पहले खराब होने पर रफनेस इंडेक्स का पालन भी जरूरी है। एनएचएआई के रिकॉर्ड के मुताबिक, टोल वसूलने वाली कंपनी ने वर्ष 2017 तक 20 किलोमीटर को छोड़कर शेष भाग का नवीनीकरण कर दिया है।
मार्च 2020 तक 21 किमी से 42 किमी तक के सड़क का नवीनीकरण बाकी है। यह हिस्सा बंथरा से नवाबगंज के बीच स्थित है। वहीं, हकीकत यह है कि इस सड़क का बड़ा हिस्सा खराब है। डेली पैसेंजर भी बताते हैं कि सड़क मानक से सौ गुना ज्यादा खराब है। यहां सिर्फ करोड़ों रुपये टोल वसूलने पर ध्यान दिया जा रहा है। टोल प्लाजा पर भी इतने बड़े-बड़े स्पीड ब्रेकर लगा दिए हैं, जो कहीं से भी एनएचएआई के मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
लखनऊ-कानपुर रोड के 8 किलोमीटर हिस्से में पैच मिले हैं। इन्हें ठीक कराया जा रहा है। सड़क को मानक के अनुरूप रखने के लिए कंपनी को निर्देश दे दिए गए हैं। - एनएन गिरी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई