जुलूसे अलविदा में गूंजी करबला में सोने वालों माहापारों अलवेदा की सदा

करबला के बहत्तर शहीदों की याद मनाने का सिलसिला अब खत्म होने वाला है।आखरी लम्हों में अज़ादारी और मातम मजलिस जुलूस निकाल कर शोहदाए करबला को अलवेदा कहा जा रहा है।इसी क्रम में रविवार को शहर के अलग अलग इलाक़ों में फरशे अज़ा बिछा कर कहीं मजलिसें हुईं तो कहीं असिराने करबला की याद में जुलूस निकाला गया।करैली मुसल्ल ए ज़िशान में खुरशीद अकबर की ओर से मजलिस ए सय्यदुश शोहदा में मौलाना प्रोफेसर जावेद अकबर साहब ने खिताब करते हुए ग़मगीन मसायब पढ़े।वहीं अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के नौहाख्वानो ने पुरदर्द नौहा पढ़ा।दरियाबाद मे हुसैनी ग्रुप की ओर से एक जुलूस असीराने करबला में १८ ज़ुलजनाह,ताबूत हज़रत इमाम हुसैन,ताबूत हज़रत अली अकबर,अलम,हज़रत अली असग़र के झूले के साथ बनी हाशिम के १८ शहीदों की याद मे १८ ज़ुलजनाह की शबीह की मंज़रकशी की गई।लखनऊ के मौलाना अहमद रज़ा साहब ने एक एक शहीदे बनी हाशिम के नाम से मंसूब ज़ुलजनाह की मंज़रकशी में तक़रीर करते हुए सभी शहीदों की क़ुरबानी व शहादत का ज़िक्र किया।नजीब इलाहाबादी की निज़ामत में निकले जुलूस में शहर की अन्जुमन हुसैनिया रजिस्टर्ड ने दर्रद अंगेज़ नौहा पढ़ा।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया ने भारी संख्या मे मौजूद अज़ादारों के साथ सभी शबीहों के साथ जुलूस निकाला जो दरियाबाद क़ब्रिस्तान पर पहुँच कर सम्पन्न हुआ।क़ब्रिस्तान में एक बड़े पण्डाल में करबला के मैदान में शहादते इमाम हुसैन के बाद बिखरी हुई लाशों और लूटे हुए क़ाफले की मंज़रकशी की गई।दायरा शाह अजमल में नूह रिज़वी के आवास पर सालाना मजलिस का आयोजन हुआ जिसमें शहनशाह हुसैन व हनी अब्बास ने ग़मगीन मर्सिया पढ़ा मौलाना अखतर हुसैन रिज़वी ने मजलिस को खिताब करते हुए वाक़ेयाते करबला का ज़िक्र किया।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया ने नौहा और मातम का नज़राना पेश किया।