यूपी : अनुमान से कम हुई राजस्व वसूली, बनी सरकार की चिंता का कारण
खास बातें




  • पहले चार महीने में कर वसूली 87.4 प्रतिशत व करेतर 37.5 प्रतिशत पर अटकी

  • कर राजस्व की प्राप्तियां सुस्त, करेतर वसूली पटरी से उतरी

  • वैट, खनन, ऊर्जा और सिंचाई विभाग की राजस्व प्राप्तियां चिंता का विषय



 

प्रदेश की कर राजस्व वसूली तो कमोवेश अनुमान के इर्द-गिर्द हो रही है, लेकिन करेतर वसूली रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के पहले चार महीने में कुल राजस्व वसूली करीब 31 प्रतिशत पर अटकी हुई है। प्रदेश के आर्थिक संसाधनों को बढ़ाने की कोशिशें चल रही हैं, राजस्व वसूली अनुमान से कम होना चिंता का विषय बन गया है।
प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 1,40,258 करोड़ राजस्व वसूली का लक्ष्य तय किया है। इसमें अप्रैल से जुलाई 2019 के लिए कर वसूली का लक्ष्य 47,139 करोड़ रुपये और करेतर राजस्व वसूली का लक्ष्य 5,286 करोड़ रुपये तय किया गया था। 
जुलाई तक के लिए तय लक्ष्य की उपलब्धि की समीक्षा में पता चला है कि कर वसूली तो लक्ष्य की 87.4 प्रतिशत हुई है लेकिन करेतर राजस्व वसूली मात्र 37.5 फीसदी पर अटकी हुई है। जीएसटी की वसूली लक्ष्य से अधिक रही है, लेकिन वैट की प्राप्तियां 80 प्रतिशत पर रुक गईं।

ऊर्जा विभाग जुलाई तक तय लक्ष्य 1088 करोड़ के मुकाबले 455 करोड़ रुपये ही वसूल सका। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की वसूली लक्ष्य के आधे 717 करोड़ रुपये पर ही ठहर गई। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिलाधिकारियों को पट्टों का व्यावहारिक रूप से परीक्षण करने का अधिकार दे दिया गया है जिससे बकाया पट्टे भी अक्तूबर तक चालू हो जाएंगे। 

आरसी वसूली के लिए विशेष अभियान के अलावा निजी भूमि को बालू व मौरंग के लिए खोल दिया गया है। इससे भी राजस्व में वृद्धि होगी, लेकिन इन सब प्रयासों के बावजूद वार्षिक लक्ष्य की 80 प्रतिशत प्राप्तियां ही होने की संभावना है। सिंचाई विभाग की वसूली लक्ष्य का केवल 25 प्रतिशत ही रही। वाहनों की बिक्री घटने से परिवहन विभाग की प्राप्तियां भी लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं।

वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने पिछले वित्तीय वर्ष की वसूली और इस वर्ष के लक्ष्य के अनुपात में पहली तिमाही में प्राप्त राजस्व की विस्तार से जानकारी दी गई है। मुख्यमंत्री ने वसूली बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। संबंधित विभागों को उस पर अमल के निर्देश भेज दिए गए हैं। राजस्व बढ़ाने के लिए ही पेट्रोल व डीजल के मूल्य में वृद्धि की गई है।



मुख्यमंत्री के अहम निर्देश


कृषि फार्मों का पीपीपी मॉडल पर हो संचालन : मुख्यमंत्री ने कृषि फार्मों की खराब स्थिति का संज्ञान लिया है। उन्होंने फार्मों के बेहतर संचालन के लिए इन्हें पीपीपी मॉडल पर निजी कंपनियों को देने पर विचार करने का निर्देश दिया है। इससे सरकार का खर्च बचेगा और आय बढ़ सकेगी।
 ओवरलोडिंग पर स्रोत से ही रोक : खनन नीति के अंतर्गत दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड व पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे तथा जेवर एयरपोर्ट के लिए आपूर्ति बढ़ाई जाए। ओवरलोडिंग को स्रोत पर ही रोका जाए और प्रभावी प्रवर्तन से लक्ष्य प्राप्त किया जाए।
 बिजली अधिकारियों के घरों पर लगेंगे मीटर : मुख्यमंत्री ने राजस्व वसूली बढ़ाने के लिए बिजली विभाग के अधिकारियों के घरों पर भी मीटर लगवाने और उपभोग की सीमा तय करने का निर्देश दिया है। तय सीमा से अधिक बिजली खर्च की कीमत अदा करनी होगी।
डग्गामार बसों पर कड़ी कार्रवाई : डग्गामार बसों की ओवरलोडिंग रोकने के लिए कठोर कार्रवाई हो। बस अड्डाें का विकास कर वाणिज्यिक उपयोग शुरू कर राजस्व प्राप्तियां बढ़ाई जाएं। अनुबंधित बसों को एक अच्छा व एक सामान्य रूट दिया जाए जिससे प्राप्तियों में वृद्धि होगी।



जानें राजस्व वसूली का हाल




  •  कुल वार्षिक लक्ष्य    1,40,258 करोड़ रुपये

  • जुलाई तक वसूली    43,185 करोड़रुपये

  • कर राजस्व का लक्ष्य (जुलाई तक)    47,139 करोड़ रुपये

  • जुलाई तक वसूली    41,203 करोड़ रुपये

  • करेतर राजस्व का लक्ष्य (जुलाई तक)    5,286 करोड़ रुपये

  • जुलाई तक वसूली    1,982 करोड़ रुपये