डॉ आर. पी. वर्मा सरस्वती सम्मान से सम्मानित होंगे

 प्रयागराज,प्रख्यात शिक्षाविद् एवं पूर्व अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड प्रयागराज के डाॅ.आर.पी.वर्मा राज्य स्तरीय शिक्षक ''सरस्वती सम्मान'' से सम्मानित होंगे।
लखनऊ/प्रयागराज/उन्नाव 
प्रख्यात शिक्षाविद् और उ0प्र0 माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड प्रयागराज के पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान में राजकीय महाविद्यालय गोसाईखेड़ा उन्नाव उ0प्र0 के हिन्दी विभाग में एसोसिएट.प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत है। डाॅ. वर्मा एक प्रतिष्ठित कवि, लेखक, कहानीकार, उपन्यासकार एवं समीक्षक हैं। डा. वर्मा को लेखन तथा शोध कार्य केे लिए उच्च शिक्षा के राज्य स्तरीय शिक्षक सरस्वती सम्मान के लिए चयनित किया गया। शिक्षक दिवस 5 सितम्बर को लखनऊ में आयोजित समारोह में उ0प्र0 के मा0 मुख्यमंत्री जी तथा मा0 उपमुख्यमंत्री जी/उच्च शिक्षा मंत्री के हाथों से सम्मानित किया जायेगा। डाॅ. वर्मा मूलतः अम्बेडकरनगर जनपद (उ0प्र0) के गाॅंव हाजीपुर में एक दलित परिवार में पिता डा. राम आसरे और माता श्रीमती केवलपत्ती देवी के यहाॅं 01 मार्च 1974 को जन्म हुआ। डाॅ. वर्मा की प्रारम्भिक शिक्षा मालीपुर पाठशाला और निर्मला जुनियर हाई स्कूल चितौना कला कालेपुर महुवल फैजाबाद में हुई तथा हाईस्कूल जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सुरहुरपुर फैजाबाद और इण्टरमीडिएट की परिक्षा बाबा बरूआदास इण्टरमीडिएट कालेज परूइया आश्रम फैजाबाद से परीक्षा उत्तीर्ण किया इसकेे पश्चात डाॅ. वर्मा इलाहाबाद विश्वविद्यायल से स्नातक की डिग्री लिया। सन् 1997 में डॅॅा. वर्मा ने एम.ए. हिन्दी की परीक्षा बी.एच.यू. वाराणसी से उत्तीर्ण की। लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ से एम.फिल् (हिन्दी) की उपाधि लेकर डाॅ. सम्पूर्णानन्द विश्वविद्यालय वाराणसी से शास्त्री की परीक्षा उत्तीर्ण की शिक्षा के प्रति प्रगाढ़ पे्रम डाॅ.  वर्मा  बचपन से ही था। उन्होंने मराठी की परीक्षा लखनऊ विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की। डाॅ. वर्मा ''आधुनिक ब्रज भाषा काव्य परम्परा में 'पारावार ब्रज कौं' का काव्य शास्त्री एवं समाज मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन'' विषय पर प्रो. शंकर लाल यादव के निर्देशन में पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की और पुनः लखनऊ विश्वविद्यालय में डी.लिट् में प्रवेश लेकर पुनः प्रो. शंकर लाल यादव के निर्देशन '' आधुनिक ब्रज एवं अवधि काव्य में प्राप्त लोक तत्वों का तुलनात्मक अध्ययन'' विषय पर 28 वर्ष की अवस्था में डाॅ. वर्मा को डी. लिट् की उपाधि लखनऊ विश्वविद्यायल लखनऊ से प्राप्त हुई। इसके पश्चात विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली से नेट की परीक्षा भी उत्तीर्ण की। उ0प्र0 माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड प्रयागराज के सबसे कम उम्र (38 वर्ष की आयु में) वर्ष 2011 में अध्यक्ष थे और इसके पूर्व चयन बोर्ड के सदस्य भी थे। डाॅ. वर्मा ने चयन बोर्ड केे अध्यक्ष पद पर रहते हुए हेल्पलाइन, हेल्पडेस्क, आनलाइन फार्म, लिए जाने, सी0सी0टी0वी0 कैमरा, गेट पास, टी0जी0टी0 एवं पी0जी0टी0 प्राधानाचार्य के इण्टर में कोडिंग-डिकोडिंग एवं शानदार बिल्डिंग का निर्माण, टी0जी0टी0 व पी0जी0टी0 के अभ्यार्थियों को कार्बन काॅपी उपलब्ध करवाना और चयन प्रक्रिया मंे पारदर्शिता सुचिता एवं पवित्रता बनाये रखने के लिए सहित अन्य अनेक उल्लेखनीय कार्य किया था। जिसकी आज भी सराहना होती है। वरिष्ठ शिक्षाविद् डाॅ. आर.पी. वर्मा द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं की संख्या 150 से अधिक है प्रख्यात शिक्षाविद् डाॅं. वर्मा द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनारों/संगोष्ठियों की संख्या 120 से अधिक है वरिष्ठ शिक्षाविद् डाॅ. आर.पी. वर्मा द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय स्तर केे पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की संख्या 80  से अधिक है। पुस्तकें विभिन्न विषयों पर डाॅ. वर्मा द्वारा लिखी गयी है, जिनमें स्नातक एवं परास्नातक के हिन्दी तथा राजनीतिशास्त्र के विषय के विद्यार्थियों द्वारा बड़ी चाॅव एवं लगन केे साथ संदर्भ के रूप में अध्ययन की जा रही है। वरिष्ठ शिक्षाविद डाॅ. आर.पी. वर्मा को विभिन्न साहित्यिक उपलब्धियों केे लिए प्रदेश के विभिन्न प्रान्तों विदेशों के महत्वपूर्ण संस्थाओं अन्तर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट 56 से अधिक अवार्ड प्राप्त कर चुके है। प्रो. वी. पाण्डेय पूर्व कुलपति रामभद्राचार्य विश्वविद्यालय चित्रकूट ने डाॅ. वर्मा के विषय में कहा कि इतने कम उम्र में उनके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में जो उल्लेखनीय योगदान किया गया है उसेे भारत का समाज कभी भुला नहीं सकता। डाॅ. वर्मा जैसे बहुआयामी और सर्जक व्यक्तित्व हिन्दी साहित्य में दुर्लभ है, उनका जीवन कांन्तिमय है। निरन्तर सत्यान्वेषण अनुसंधान प्रियता एवं रूढ़ियावादिता पर प्रहार उनके जीवन की विशेषता है। सफलता का श्रेय अपने माता पिता व प्रिय पत्नी रेखा वर्मा तथा गुरूजनों एवं मित्रों डाॅ. रूदल यादव प्राचार्य, डाॅ. राम सहाय पूर्व श्रेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी डाॅ. विपिन कुमार पाण्डेय एसोसिऐट प्रोफेसर डाॅ. शकुंतला पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ तथा डाॅ. विरेन्द्र सिंह यादव को देते हैं।