धक्कामार' सरकारी एंबुलेंस सेवा, रास्ते में हुई बंद, गर्भवती को गोद में अस्पताल लाए परिजन
मैनपुरी में गर्भवती को लेकर जा रही 102 एंबुलेंस अस्पताल के पास खराब हो गई। परिजनों ने धक्का मारकर उसे स्टार्ट कराने का प्रयास किया। इसी बीच महिला को प्रसव पीड़ा तेज होने पर परिजन उसे गोद में लेकर डिलेवरी रूम तक पहुंचे। यहां महिला ने बच्ची को जन्म दिया है।  
शुक्रवार को कुसमरा क्षेत्र के गांव हिरौली निवासी कर्मवीर सिंह की पत्नी दयावती को प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने 102 डायल कर एंबुलेंस बुलाई। 11 बजे चालक आरिफ खां एंबुलेंस लेकर गांव पहुंचा। परिजन जब गर्भवती दयावती को कुसमरा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जा रहे थे। 
तभी अस्पताल के गेट के पास अचानक एंबुलेंस बंद हो गई। करीब 20 मिनट तक चालक एंबुलेंस को ठीक करने का प्रयास करता रहा। इस बीच परिजनों से धक्का भी लगवाया, लेकिन एंबुलेंस आगे नहीं बढ़ी। प्रसव पीड़ा बढ़ने पर परिजन महिला को गोद में उठाकर प्रसव कक्ष तक ले गए। 
एंबुलेंस चालक ने बताया कि एंबुलेंस की बैटरी खराब थी, दूसरी गाड़ी न होने पर वह महिला को लेने के लिए धक्का के जरिए एंबुलेंस को स्टार्ट करके गया था। अस्पताल गेट के पास एंबुलेंस अचानक बंद हो गई, जो धक्के से भी स्टार्ट नहीं हुई। महिला को घर से अस्पताल ले जाया जा रहा था। 

एंबुलेंस के रखरखाव में बरती जा रही लापरवाही 


जिले में संचालित 102 एंबुलेंस के रखरखाव में विभाग द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। अधिकारी समय से एंबुलेंस की मरम्मत नहीं करा रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि गर्भवती महिलाओं व गंंभीर मरीजों की जान आफत में पड़ जाती है। 
शुक्रवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुसमरा पर खराब हुई एंबुलेंस का स्ट्रेचर भी खराब था। इसी कारण जब एंबुलेंस अस्पताल के मुख्य गेट पर खराब हुई तो परिजनों को स्ट्रेचर के बजाय गर्भवती को गोद में लेकर जाना पड़ा। 
एंबुलेंस प्रभारी धीरज कुमार ने बताया कि एंबुलेंस के रखरखाव के लिए हरसंभव कार्य किया जा रहा है। जैसे ही चालक द्वारा एंबुलेंस के बारे में जानकारी दी जाती है उसे तुरंत सही कराया जाता है। जो नई एंबुलेंस आई हैं उनमें दो-दो बैटरी हैं, लेकिन पुरानी एंबुलेंस में एक ही बैटरी है। इससे कभी-कभी दिक्कत आ जाती है।