अनशनकारी छात्र की हालत बिगड़ी

प्रयागराज,छात्रसंघ बहाली आंदोलन  के लिए 48 दिन तक धरना प्रदर्शन करने के बाद छात्र आमरण अनशन पर बैठे छात्रों का आज तीसरा दिन है।समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनशन कारी छात्रों के ऊपर अराजक होने का आरोप लगाते हुए,इस बात के लिए FIR दर्ज करा दिया,कि अनशन कारी  छात्रों ने आमरण अनशन के दूसरे दिन छात्रसंघ भवन का ताला तोड़ दिया।इससे आहत होकर संयुक्त संघर्ष समिति ने निम्नलिखित संदेश प्रस्ताव पारित किया।*हिंसा हमारा उद्देश्य नहीं, हमारा उद्देश्य मृत्यु तक अहिंसा का दामन ना छोड़ना है


     हम सत्याग्रह इसलिए कर रहे हैं,कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन की आत्मा शुद्ध हो संस्कारित हो और बदले की भावना से मुक्त हो।छात्रसंघ हमारा अधिकार है और उस अधिकार को अपने पद के बल  से नष्ट करना कहां तक जायज है? यदि कुलपति महोदय चाहे तो अपनी अंतरात्मा से पूछ ले हम चाहते तो हिंसा का रास्ता भी अपना सकते थे परंतु हम गांधीवादी विचारधारा को आजमाना चाहते हैं कि क्या यह सत्य में आज के परिपेक्ष में कारगर है? क्या सत्य और अहिंसा एक कारगर यंत्र है? हम देखना चाहते हैं! इसके पहले हिंसा हमारे भूत के गौरव वर्तमान की हकीकत और भविष्य की संभावनाओं को नष्ट कर दे हम गांधी के सत्य और अहिंसा के मार्ग पर, सत्याग्रह के मार्ग पर चलकर देखना चाहते हैं।इलाहाबाद के कुलपति महोदय को सत्य और अहिंसा में कोई भरोसा नहीं है। यदि वह चाहते हैं अहिंसा समाप्त हो और हिंसा का रूप धारण कर ले आंदोलन, तो उनको भगवान सन्मति दे, उनको बुद्धि दे, और उनको नैतिक बल दें।


हिंसा शरीर मन और  बुद्धि का गुण है जबकि अहिंसा अंतरात्मा का गुण है*। यदि माननीय कुलपति महोदय की अंतर आत्मा जीवित हो और जाग रही हो तो अहिंसा के इस शंखनाद को सुने और राष्ट्रपिता के लिए उनके दिल में कहीं किसी कोने में अगर थोड़ी भी जगह हो तो इस सत्याग्रह का कारण समझने का प्रयास करें और अपनी बेजा की जिद और हठ त्याग दें छात्रों का मूल अधिकार छात्रसंघ बहाल करें।


यदि अहिंसा की इस दस्तक को अनसुना कर दिया गया, यदि सत्याग्रह के इस प्रयोग को विफल कर दिया गया ,यदि  युवाओं की संस्कारित ऊर्जा को चुनौती दी गई , तो इतिहास से पूछ ले कि भविष्य क्या होगा।


आज आमरण अनशन के तीसरे दिन अनशनकारी छात्र संघ के महामंत्री शिवम सिंह का रक्तचाप 90 बटा 60 हो गया।तथा संयुक्त सचिव सत्यम सिंह सनी को लूज मोशन होते रहे और अविनाश विद्यार्थी को  102  डिग्री फारेनहाइट बुखार रहा बार बार सूचित करने के बाद भी इलाहाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी संवेदनशीलता की सरहदों को पार करते हुए तकनीकी खामियों का हवाला देते रहे और अनशन कारियों को उनके हाल पर छोड़ दिया और अनशन स्थल तक आना भी उचित नहीं समझा। संयुक्त संघर्ष समिति ने इसकी सूचना स्वास्थ्य मंत्री जी को अग्रसारित कर दी है।