इलाहाबाद बंद में छात्र संघ ने झोंकी ताकत


छात्रसंघ बहाली के मुद्दे को लेकर छात्रसंघ भवन पर चल रहा क्रमिक अनशन अनवरत 23 वें दिन भी जारी रहा ,सुबह करीब 10:00 बजे भारी संख्या में छात्र नेताओं व छात्रों का जुटान हुआ।


जिसमें हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आहूत इलाहाबाद बंद को सफल बनाने और छात्र संघ की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए छात्रसंघ पदाधिकारियों के नेतृत्व में छात्रों के पांच समूहों का गठन किया गया ,प्रत्येक समूह को अलग-अलग क्षेत्रों में बंद के संदर्भ में परिभ्रमण के लिए कहा गया।


छात्रों के इन गुटों ने पुराना कटरा, सलोरी, छोटा बघाड़ा ,तेलियरगंज आदि छात्र बाहुल्य इलाकों में व्यापारियों से बंद के समर्थन में अपने प्रतिष्ठान बंद रखने का आग्रह किया इसके बाद सभी समूह सिविल लाइंस स्थित बस अड्डे पर एकत्रित हुए और जुलूस के शक्ल में सुभाष चौराहे पर स्थित सभा स्थल तक पैदल मार्च किया।


इस सभा को संबोधित करते हुए छात्रसंघ अध्यक्ष उदय प्रकाश यादव व महामंत्री शिवम सिंह ने कहा प्रयागराज के अभियान की इस लड़ाई का छात्र संघ अपनी पूरी सामर्थ्य के साथ समर्थन करता है और इस लड़ाई को एक अंतिम परिणाम तक पहुंचाने में अपना पूरा जोर लगा देगा।


सभा को संबोधित करते हुए *पूर्व अध्यक्ष रोहित मिश्र व उपाध्यक्ष अदील हमजा* ने कहा कि इलाहाबाद प्रदेश की न्यायिक और सांस्कृतिक राजधानी है ,जिसकी अपनी विशेषता और सांस्कृतिक महत्व है । *अगर संततियां गूंगी हो जाए तो संस्कृतियों विकलांग हो जाएंगी* यह लड़ाई उसी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की है।


हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष श्री राकेश पांडे ने छात्रसंघ बहाली के इस आंदोलन को अपना आंदोलन बताया व इसे अंतिम परिणीत तक पहुंचाने का संकल्प लिया।


इस दौरान पूर्व अध्यक्ष अवनीश यादव ,पूर्व महामंत्री निर्भय द्विवेदी, पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह ,निवर्तमान उपाध्यक्ष अखिलेश यादव ,वरिष्ठ छात्र नेता अखिलेश गुप्ता गुड्डू ,रजनीश सिंह रिशु ,अजीत विधायक, अनुभव सिंह छोटू ,अविनाश विद्यार्थी ,अजय सम्राट, सौरभ सिंह बंटी ,दुर्गेश सिंह ,जितेंद्र धनराज ,सत्यम कुशवाहा, राहुल तिवारी आदि मौजूद रहे।


संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रोफेसर राम किशोर शास्त्री भूतपूर्व अध्यक्ष आटा संघ के बारे में जो कुलपति के पीआरओ चितरंजन कुमार ने निम्न स्तर का बयान दिया है उसकी घोर निंदा करता है तथा प्रोफेसर राम किशोर शास्त्री से आग्रह करता है कि वह मानहानि का मुकदमा दाखिल करें क्योंकि उपरोक्त कथन समस्त शैक्षिक परंपरा का अपमान है*