आर्थिक हालात पर सरकार व विपक्ष के अलग-अलग दावे, कितना लाभ दे पाएंगे आरबीआई के 1.76 लाख करोड़?

कितना लाभ दे पाएगा रिजर्व बैंक का 1.76 लाख करोड़


सरकार इन पैसों का कहां और कैसे करेगी उपयोग?



क्या देश आर्थिक आपातकाल के दौर से गुजर रहा है? रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांता दास ने कुछ दिन पहले देश आर्थिक रफ्तार सुस्त पड़ने की आशंका व्यक्त की थी। इसके बाद नीति आयोग के उपाध्यक्ष का बयान आया। इसके बाद पूर्व रिजर्व बैंक के गवर्नर, अर्थशास्त्री विमल जालान की अध्यक्ष में गठित समिति ने केन्द्रीय बैंक के रिजर्व से 1.76 लाख करोड़ रुपये जारी करने को मंजूरी दे दी।

लेकिन इसको लेकर भी अर्थ शक्तियों चिंता बढ़ रही है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे लेकर सवाल खड़ा किया है। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने अर्थव्यव्स्था की हालत पर श्वेत पत्र की माँग की है ।इस बीच पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए निर्यात और निवेश को बढ़ाने का विकल्प सुझाया है।


लेकिन सरकार इसे विपक्ष का झूठा प्रचार बता रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पुरा भरोसा है कि सरकार ने हाल ही ने जो क़दम उठाए हैं उनका जल्दी ही असर दिखेगा और आर्थिक चिन्ताएँ दूर होंगी।

कैसे निबटेगी सरकार : वित्तमंत्री को सरकर के क़दमों पर पूरा भरोसा 


केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रिजर्व बैंक से 1.76 लाख करोड़ रुपये जारी होने के निर्णय के बाद मीडिया के कुछ सवालों का जवाब दिया, लेकिन वित्त मंत्री बैंक के रिजर्व से केन्द्र सरकार को मिलने वाली इस राशि के इस्तेमाल का कोई रोडमैप पेश नहीं किया। उनके पास इस सवाल का अभी कोई उत्तर नहीं था। वित्तमंत्री ने कहा कि इसकी जानकारी बाद में दे दी जाएगी। केन्द्र सरकार देश में आर्थिक रफ्तार सुस्त चलने को स्वीकारने लगी है, लेकिन इसे रफ्तार देने का कोई खाका नहीं पेश कर पा रही है। अभी वित्त मंत्री ने केवल देश के कारोबारियों को निर्भीक होकर व्यापार करने का भरोसा दिया है। उन्होंने रिजर्व बैंक के सरप्लस से 1.76 लाख करोड़ रुपये जारी होने पर सवाल खड़ा करने वालों को भी आड़े हाथो लिया है। उन्होंने कहा है कि सरकार हर तरह की स्थिति से निबटने के सारे उपाय कर रही है।लोगों को परेशान होने की ज़रूरत नहीं है।

क्या सच में आर्थिक रफ्तार सुस्त है?




क्या सच में आर्थिक रफ्तार सुस्त है?



  • रिजर्ब बैंक ऑफ इंडिया ने 2019-20 के लिए देश की विकास दर के अनुमान को घटाकर 6.9 प्रतिशत बताया है। यह पिछले पांच सालों में सबसे कम दर है।

  • केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में निवेश बढ़ाने के रास्ते पर चल रही है। रेलवे जैसे विभाग द्वारा ट्रेन परिचालन में निजी भागेदारी बढ़ाने, एयर इंडिया, बीएसएनएल जैसे उपक्रमों के खस्ताहाल होने का उपाय न होना ऐसा अंदेशा बढ़ा रहा है।

  • ऑटो सेक्टर में 31 प्रतिशत की सुस्ती चल रही है। अनुमान के मुताबिक करीब चार लाख अस्थाई कर्मचारियों की नौकरी जा चुकी है और 15 लाख लोगों के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है।

  • घरेलू मांग, औद्योगिक उत्पादन, खनन क्षेत्र की रफ्तार अप्रत्याशित तरीके से लगातार सुस्त हो रही है।

  • रीयल स्टेट, स्टील, टेलीकॉम, बैंकिंग, पॉवर क्षेत्र से सरकार की एजेंसियों के पास खुशखबरी की खबरें लगातार कम आ रही हैं।

  • आयात की तुलना में देश का निर्यात कम होने से विदेशी मुद्रा की आय में कमी आ रही है और इससे विदेशी मुद्रा भंडारण कम हो रहा है।

  • राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है।


बढ़ती चिंता के पांच बड़े कारण



  • लंबे समय से घरेलू मांग घटने से उत्पादन ईकाई का कमजोर संकेत देना।  

  • अंतरराष्ट्रीष्ट उथल-पुथल खासकर चीन और अमेरिका के बीच छिड़े व्यापार युद्ध से निवेश का वातावरण प्रभावित होना।

  • कच्चे तेल के दाम में वृद्धि, डॉलर के मुकाबले रुपये का गिरना।

  • विदेशी निवेशकों के लगातार देश से पैसा निकालकर बाहर ले जाने की संभावना का बरकरार रहना।

  • अमेरिका की इनवेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी मार्गन स्टैनली जैसी संस्थाओं का अगले कुछ महीने में फिर मंदी आने का संकेत देना।  


1.76 लाख करोड़ जारी होना क्या चिंता की बात?


अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार का कहना है कि यह पैसा रिजर्व बैंक के पास जोखिम से भरे दिनों के लिए होता है। इसलिए सरकार को रिजर्व बैंक के सरप्लस से 1.76 लाख करोड़ रुपये लेने जैसी स्थिति से बचना चाहिए था। रिजर्व के बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य को भी यह ठीक नहीं लग रहा था। इसी तरह की स्थितियों के कारण रिजर्व बैंक के भीतर टकराव की स्थिति बढ़ी थी। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल भी विरल आचार्य की राय से सहमत बताए जा रहे थे। 

वहीं सीआईएमएसएमई के अध्यक्ष मुकेश मोहन का कहना है कि 1.76 लाख करोड़ रुपये सरकार के पास आने से अर्थव्यवस्था की सुस्ती को दूर करने में बड़ी सहायता मिलेगी। वहीं केंद्रीय वित्त मंत्रालय के एक पूर्व सचिव का कहना है कि रिजर्व बैंक से मिलने वाली इस राशि का सही तरीके से इस्तेमाल करना होगा। सूत्र का कहना है कि पिछले पांच सालों से अर्थव्यवस्था को एक के बाद एक झटके लगे हैं। इसके सामानांतर केंद्र सरकार ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया। पूर्व बैंकिंग सचिव ने भी नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि उन्हें 1.76 लाख करोड़ रुपये रिजर्व बैंक से मिल जाने के बाद भी कोई अच्छी संभावना नजर नहीं आ रही है। यह सब केवल तत्कालिक उपाय भर हैं।

रिजर्व बैंक ने अब तक कितना दिया सरकार को


2004 से 2014 के दौरान केंद्रीय रिजर्व बैंक से केंद्र सरकार को हर साल औसतन 20 हजार करोड़ रुपये दिए। 2014-2019 के दौरान केंद्रीय बैंक ने सरकार को हर साल औसतन 54 हजार करोड़ रुपये दिया। 2015-16 में यह राशि 65,890 करोड़ रुपये थी। 2016-17 में 30, 659 करोड़ रुपये और 2017-18 में 50 हजार करोड़ रुपये थी। 2019-2020 के लिए केंद्रीय बैंक 1.76 हजार करोड़ रुपये दे रहा है।