स्वास्थ्य विभाग खाऊकमाऊ नीति में मस्त, संक्रामक रोगों का खतरा सर पर

रामसनेहीघाट, बाराबंकी। गर्मी और बरसात का मौसम होने से सक्रमण बीमारियों का जहा खतरा बढ़ गया गई। वही स्वास्थ्य व पंचायत विभाग की खाऊ कमाऊ की  नीति के चलते गावो में गन्दी नालियों में दवा का छिड़काव नही हो सका है। इससे सरकार की पारदर्शी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगता नजर आ रहा है। 
ब्लॉक बनीकोडर सहित तहसील क्षेत्र के बनीकोडर, दरियाबाद, पूरे डलई क्षेत्रो में हर कस्बा व गांवों मे फैली गन्दगी बीमारियों को दावत दे रही हैं। बीमारी को जन्म देने वाली जगह जगह गन्दगी  होने के बाद भी  सफाई पर कोई ध्यान नही दिया जा रहा जबकि नगर पंचायतों व ग्राम पंचायतों को प्रतिवर्ष सरकार की ओर से प्रत्येक ग्राम पंचायत में गठित ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति को दस हजार रुपये का बजट प्रत्येक वर्ष शासन से दिया जाता है और समिति में ग्राम प्रधान अध्यक्ष व  ए एन एम को सह खातेदार नामित किया जाता है।
इसमें समिति की जिम्मेदारी होती है कि बजट का उपयोग करके गांव में सफाई रखें और समय पर दवा का छिङकाव करायें जिससे संक्रामक बीमारियों के पैर पसारनें पर ब्रेक लगाई जा सके। किन्तु पंचायत चुनाव के बाद से अब तक कही भी कोई दवा का छिड़काव नही हो सका है।
सूत्रो से मिली जानकारी में बताया गया कि-बनीकोडर 92 ग्राम पंचायतों की कई ऐसी भी ग्राम पंचायते हैं जिनके खाते खुले होनें के बावजूद भी प्रधान एवं एएनएम कई वर्षों से आज तक संक्रामक रोग जैसी किसी प्रकार की दवा का छिङकाव न  कराकर पैसों का बन्दरबांट किया गया।और अपनी कागजी कार्यवाही पूरी कर संक्रामक जैसी बीमारियों को न्यौता दिया गया।
        जबकि कुछ ग्राम प्रधानों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की कमीशन खोरी के चलते अभी तक स्वास्थ्य पोषड समिति में धन ही नही आया ग्रामो में तैनात एएनएम आती ही नही। आशा बहुओं के सहारे कार्य कराती है। जब इसकी शिकायत सी एच् सी प्रभारी से की जाती है तो वह कोई ध्यान नही देते। एएनएम पर प्रभारी द्वारा कार्यवाही के बजाय ग्राम प्रधानों को ही दोषी ठहराया जाता है । भेंदुआ बहरेला, में तैनात एएनएम पर तो इसके पूर्व कई आरोप भी लग चुके है। कुल मिलाकर यह योजना मात्र कागजी बनकर रह गई है। धरातल पर कही भी नजर नही आ रही। जबकि देश के प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री योगी सहित सभी भाजपाई स्वच्छता अभियान में झाड़ू लगा रहे है ऐसा नही है कि बङे अधिकारी नही जानते। 
किन्तु जानते हुए भी अंजान बनकर अपनें कमीशन के चक्कर में योजना की ऐसी तैसी किये हुए है। ग्राम पंचायतों में बनी स्वास्थ्य स्वच्छता समिति महज कागजो पर ही नजर आ रही है इस समिति में सदस्यों को ही नही पता कि यह समिति का क्या कार्य है स्वास्थ्य पोषण समिति सहित स्वास्थ्य व पंचायत विभाग की उदासीनता के चलते गावो में बरसात मौसम में ग्रामीण बीमारियों की चपेट आ रहे है अब देखना ये कि ऐसी समिति पर उच्च अधिकारी कोई कार्यवाही करते हैं या ऐसे ही भृष्टाचार को बढावा देते रहेंगे।


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