वरिष्ठ लिपिक को 21 लाख के साथ पुलिस ने किया गिरफ्तार बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर गिरफ्तारियों का दौर जारी

वरिष्ठ लिपिक को 21 लाख के साथ पुलिस ने किया गिरफ्तार
बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर गिरफ्तारियों का दौर जारी
बीएसए की कार्यशैली पर भी खड़े हो रहे तमाम सवाल ।
सत्यापन के नाम वसूली पर जनसंदेश उठा चुका है पूर्व में सवाल
बाराबंकी। शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार उस समय शनिवार को फिर एक बार सामने आया जब वहां के वरिष्ठ लिपिक को जनपद पुलिस ने गिरफ्तार कर उसके पास से 21लाख रूपए की भारी भरकम रकम बरामद कर विभागीय भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है। जहां विभाग पहले से ही एमडीएम घोटाले को लेकर अभी उबर नहीं पाया था व सीडीओ मेघा रूपम भी शिक्षकों की ड्यूटी के प्रति नियमितता को जांचने में उस समय अंचभित रह गई जब गैरमौजूदगी को लेकर उन्हें 570 अध्यापकों की एक दिन की तनख्वाह रोकने का सख्त निर्णय लेना पड़ा। वहीं सामने आए मामले ने जनसंदेश की सत्यापन के नाम पर भारी वसूली की अर्से पूर्व उठाए सवाल को भी सत्यापित कर दिया है।
बताते चलें कि शिक्षा विभाग में बीते दिनों एमडीएम घोटाले के बाद एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे हैं। वैसे तो बीएसए कार्यालय में लूट-खसोट-भ्रष्टाचार का सिलसिला काफी वर्षोें से जारी है लेकिन इस पर गाज एक वर्ष पूर्व तब गिरी जब एमडीएम घोटाले का जिन्न सामने आया और कई माननीयों के हाथ उसमें रंगे मिले जिसमें तीन लोग जेल भी गए। लेकिन लोगों की मानें तो असली दोषी तबभी बचे रहे जिसका सुबूत शनिवार उस समय सामने आया जब विभाग के वरिष्ठ लिपिक अखिलेश कुमार को बीएसए ऑफिस के बाहर से गिरफ्तार कर पुलिस ने उनके 21 लाख की भारी रकम बरामद की। पुलिस का मानना है कि अखिलेश कुमार शुक्ल भी कहीं ना कहीं एमडीएम घोटाले में शामिल रहे हैं। लेकिन अखिलेश कुमार को काम करते हुए अभी 1 साल भी नहीं पूरा हुआ है ऐसे में उनके तार पुलिस किस थ्योरी से एमडीएम घोटाले से जोड़ रही है, यह तों पुलिस ही बेहतर बता सकती है कि उसका मकसद घोटाला खोलना है या किसी खास को बचाने में किसी नए को फंसा देना है, जैसा बीते कई माह में सामने आई पुलिसिया कार्यशैली में सामने भी आया है। वैसे सूत्रों की मानें तो इसमें जनसंदेश में पूर्व में सत्यापन को लेकर जारी लूट खसोट भ्रष्टाचार ही ज्यादा दिखाई दे रहा है। जिसमें विभागीय सूत्रों की मानें तो बीते 1 साल में हुई नियुक्तियों में शिक्षकों के सत्यापन आदि में वरिष्ठ लिपिक को पीड़ित वर्ग बीएसए का दाहिना हाथ मानकर चल रहा है। यही नवनियुक्त शिक्षक का कथन भी सुनने को मिला कि सत्यापन का मुख्य दारोमदार इन्हीं आशुतोष शुक्ला पर ही है। शिक्षकों की मानें तो प्रत्येक शिक्षक से सत्यापन के नाम पर 4000 से 5000 की वसूले जा रहे हैं। जिसमें अगर देखा जाए तो 300 अध्यापकों की नियुक्ति बीते 1 साल में हुई। जिसकी कुल रकम 15लाख की रकम ही बनती है जाहिर है कि बरामद हुए 21लाख में किसी और मद का भ्रष्टाचार भी जरूर शामिल होगा। कप्तान अजय साहनी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसकी पुष्टि की गई और बताया गया कि घोटाले की जांच के दौरान कुछ तथ्य सामने आए थे जिसमें इनकी भी संलिप्तता जाहिर होने की वजह से कप्तान के निर्देश पर क्राइम ब्रांच और नगर कोतवाली की टीम ने जांच के दौरान 20 लाख 98 हजार 670  रूपए बरामद करते हुए बीएसए कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार का खुलासा किया। बरामद रकम को सील कर दिया गया है और अखिलेश कुमार को गिरफ्तार करके मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।


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