तेज बहादुर यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, नामांकन रद्द के खिलाफ डाली याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने बीएसएफ से बर्खास्त जवान और एसपी प्रत्याशी तेज बहादुर यादव की याचिका खारिज कर दी है। तेज बहादुर यादव ने वाराणसी से नामांकन रद्द होने के खिलाफ उच्चतम न्यायलय में याचिका डाली थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी के आदेश पर दखल नहीं देंगे। तेज बहादुर यादव की याचिका को सीजेआई रंजन गोगोई की बेंच ने खारिज किया। बता दें कि तेज बहादुर यादव वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए पहले निर्दलीय उठे थे और इसके बाद उन्हें समाजवादी पार्टी ने टिकट दे दिया था। लेकिन, वाराणसी के निर्वाचन अधिकारी ने एक मई को उनका नामांकन पत्र खारिज कर दिया था
निर्वाचन अधिकारी का कहना था कि यादव प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में विफल रहे हैं। दरअसल, जनप्रतिनिधि (आरपी) अधिनियम के तहत उन्हें इस आशय का प्रमाण पत्र देना आवश्यक था कि उन्हें 'भ्रष्टाचार या राज्य के प्रति निष्ठाहीनता के लिए बर्खास्त' नहीं किया गया है।' इसके बाद तेज बहादुर यादव ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। वाराणसी में 19 मई को आखिरी चरण में मतदान होना है।
क्यों खारिज हुआ था तेज बहादुर यादव का नामांकन?
वाराणसी के निर्वाचन अधिकारी ने यादव द्वारा दाखिल नामांकन के दो सेटों में विसंगति को लेकर नोटिस जारी किया था। यादव ने 24 अप्रैल को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर दाखिल दस्तावेजों में कहा था कि उसे सीमा सुरक्षा बल से बर्खास्त किया गया है। हालांकि, 29 अप्रैल को सपा उम्मीदवार के तौर पर नामांकन हलफनामा दाखिल करते वक्त उन्होंने इस सूचना का जिक्र नहीं किया था। इसके बाद यादव से सीमा सुरक्षा बल से अनापत्ति प्रमाण (एनओसी) जमा करने के लिए कहा गया था जिसमें बर्खास्तगी के कारण बताए जाने थे। तेज बहादुर सबसे पहले उस वक्त सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने बीएसएफ में मिलने वाले खराब खाने को लेकर एक वीडियो बनाया था जो कि काफी वायरल हुआ था।