फैजाबाद: किसका बेड़ा पार लगाएंगे राम...सात बार कांग्रेस और चार बार भाजपा को मिली जीत
फैजाबाद लोकसभा सीट अयोध्या कस्बे से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर है। राजनीतिक तौर पर यह सीट सबसे ज्यादा संवेदनशील है। यहां से अभी तक सात बार कांग्रेस और चार बार भारतीय जनता पार्टी ने आम चुनाव जीता है। मौजूदा सांसद भाजपा से लल्लू सिंह हैं। अवध की पुरानी राजधानी फैजाबाद 17वें लोकसभा चुनाव में हाई-प्रोफाइल सीट है। सबकी नजरें इस सीट पर टिकी हुई हैं। यहां भाजपा को जहां राम का सहारा है वहीं, महागठबंधन और कांग्रेस कड़ी चुनौती के लिए तैयार है। राजनीतिक जानकार कहते हैं कि यह सीट कड़े जातीय संघर्ष में उलझी हुई है। आइए इस सीट के सियासी इतिहास और सियासी गणित की पड़ताल करते हैं...
अनुसूचित जाति के बाद सबसे ज्यादा हैं ब्राह्मण मतदाता
फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र के तहत यूपी की पांच विधानसभा सीटें आती हैं। ये दरियाबाद, बीकापुर, रुदौली, अयोध्या और मिल्कीपुर है। मिल्कीपुर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 2014 में मोदी लहर की बदौलत यह सीट भाजपा के खाते में तो आ गई थी। लेकिन सपा और बसपा का मत फीसदी ज्यादा नहीं गिरा था। फैजाबाद सीट पर अनुसूचित जाति के मतदाताओं के बाद सबसे ज्यादा ब्राह्मण मतदाता हैं। इस बार चुनाव में राम मंदिर भी मुद्दा नहीं है। संत समाज पहले से ही राम मंदिर को लेकर अध्यादेश न लाने की वजह से भाजपा से खफा है। ऐसे में इस सीट का सियासी गणित काफी दिलचस्प हो सकता है। फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र की 84 फीसदी आबादी हिंदू और 14 फीसदी आबादी मुस्लिम है। 


फैजाबाद सीट का चुनावी इतिहास
इस सीट पर पहली बार 1957 में आम चुनाव हुए। कांग्रेस के राजाराम मिश्र चुनाव जीते। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के अलावा यहां से 2004 में बसका के मित्रसेन यादव भी चुनाव जीत चुके हैं। समाजवादी पार्टी, भारतीय लोकदल और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भी एक-एक बार चुनाव जीत चुकी है। 1977 में भारतीय लोकदल के अनंतराम जायसवाल को फैजाबाद ने संसद पहुंचाया। 1990 में राम मंदिर आंदोलन ने भारतीय जनता पार्टी के लिए माहौल तैयार किया। पूरी आयोध्या भगवामय हो गई। 1991 में जब आम चुनाव हुए तो अयोध्या ने भाजपा के विनय कटियार को संसद की धैली पर पहुंचा दिया। अयोध्या में राम लहर थी और भाजपा राम मंदिर के मुद्दे को सबसे ज्यादा जोर-शोर से उठा रही थी। परिणाम यह हुआ कि 1996 के आम चुनाव में भी जनता ने भाजपा को जीत का मुकुट पहनाया और विनय कटियार फिर से सांसद चुने गए। 1998 में भी विनय कटियार ही जीते।
लेकिन 1998 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी को कड़ा झटका दिया और सीट छिन ली। चुनाव में समाजवादी पार्टी के मित्रसेन यादव की जीत हुई। फिर 1999 में फैजाबाद की जनता ने भाजपा के विनय कटियार के सिर जीत का सहारा बांधा। 2009 में यहां से कांग्रेस से निर्मल खत्री सासंद चुने गए। 
मौजूदा प्रत्याशियों पर एक नजर
भारतीय जनता पार्टी से इस बार यहां चुनाव मैदान में लल्लू सिंह हैं। वह मौजूदा सांसद भी हैं। कांग्रेस ने निर्मल खत्री को मैदान में उतारा है। गठबंधन से आनंदसेन यादव चुनाव मैदान में हैं। लल्लू सिंह राम मंदिर आंदोलन से उभरे हुए नेता हैं और 1991 में पहली बार विधायक बने। निर्मल खत्री दो बार यहां से सांसद रह चुके हैं। वह 1985 और 2009 में सांसद रहे। इस सीट पर पांचवें चरण में 6 अप्रैल को वोटिंग होनी है।